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最乐当窗理旧书

2018-07-16 19:44 | 齐鲁晚报 | 手机看国搜 | 打印 | 收藏 |评论 | 扫描到手机
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核心提示:20年前,我与郭瑞三同在济南市委工作,因分属两个部门,并不相识。那时,我常常在省城各种报纸上看到署名郭瑞三的书话类文章,每每想:真是个爱书懂书的人,哪个单位的呢?如能结识,该有多好。

□周长风

郭瑞三先生的第二部书话集《理我旧时书》,前不久出版问世了。读罢对他的敬佩之情增益良多。

20年前,我与郭瑞三同在济南市委工作,因分属两个部门,并不相识。那时,我常常在省城各种报纸上看到署名郭瑞三的书话类文章,每每想:真是个爱书懂书的人,哪个单位的呢?如能结识,该有多好。殊不知,当时我俩的办公室仅相隔一层楼板。

至2011年,我到市政协任职,从一位同事处看到郭瑞三著的《两用庐书情》一书,方知他前些年也到市政协工作,而今已经退休了。很快这位同事为我求得郭瑞三赠书,由此我们开始交往,相知日深,渐成好友。

郭瑞三1968年参加工作,50年来,他的业余时间、退休时光以及简单生活支出后的积蓄,大都用来访书、淘书、读书、藏书。他有多少藏书呢?他从没有清点过。再者,他居所逼仄,卧室兼书房,故称“两用庐”,书随处堆放,且随时增加,也难以细数。郭瑞三不但把已有的藏书或详或略都读过,而且还经常到旧书摊和书店买书,到图书馆借书。其阅读量之大、阅读面之广、阅读度之深,以他曾应多家报刊之邀开设专栏,写作发表了数以百计的书话,便可证明。

济南著名学者李永祥教授2006年即予赞言:瑞三其人“沉稳、平实,言谈话语之中,带着浓郁的书卷气”,其文“亲切、平实、厚重,像老朋友谈心一样”,读之“如对朗月,如沐春风,有一种淡远而甘淳的韵致”。之所以如此,也正如李永祥教授所言:“他把读书视为生命过程中的一种不可须臾离缺的内容,静默自处,廉隅自守,不为喧嚣浮华的世风所裹挟。”

郭瑞三年轻时在企业工作,后进入党政机关,并无专门治学与写作,但他的文章无论是图书版本研究、地方文史考证、风物民俗杂感、社会文化批评,俱表现出深厚的学术素养、广博的知识储藏、精到的思想识见和沉静从容的文笔。读其书如从山阴道上行,移步换景,令人耳目应接不暇。这里试举一例:

今年初有一则报道:泰安市邱家店镇旧县村每年正月十六过“爬桥节”,周围村庄的人们纷纷前往,在大汶河桥上走个来回,寓意把一年的晦气都丢到流逝的河水里,据说此习俗已有三四百年的历史。

一位邻居阅罢啧啧称奇,我说你若读过郭瑞三《理我旧时书》中的《济南等地的“走百病”风俗》一文,就会知道,这曾是明代以后全国各地特别是北方普遍流行的一种风俗。郭文引用了《山东省志·民俗志》《历城县志》《新年风俗志》《济南快览》《济南通史》《北京风俗杂咏》《潍县竹枝词》《历代风俗诗选》等古今图书,告诉读者,旧时每逢正月十六,男女老少尤其是妇女,成群结队走出家门,过桥、登城、游眺,以求全家新年安康。在山东,济南等地叫“走百病”,莒县叫“走老貌”,鄄城叫“跑百龄”,潍坊、高密、邹城亦各有其称。而在成都则叫“游百病”,在北京直接就叫“走桥”。

郭瑞三之所以如此爱书、懂书,原因很多,比如深受身为教师的父亲的教诲和影响,但有一点似可多说几句。1963年,因学习成绩优异,郭瑞三从老家长清县选送济南一中读高中。济南一中创办于1903年,位于济南老城内,自创立至“文革”前,名师云集,人才荟萃,堪称山东省现代史上最有名的中学。郭瑞三赶上了那个时代的尾巴,传承了老一中的精神因子,这应与济南一中的历史风尚和文化底蕴有关。一座学校,无论大学中学还是小学,都应葆有自己历久弥新的历史传统,显扬卓然于众的文化特色,使它成为一代代学生共同的青春记忆和生命印痕。惜乎当下教育界和全社会对此不甚重视。

《理我旧时书》一名乃化用《木兰诗》“脱我战时袍,著我旧时裳。当窗理云鬓,对镜贴花黄”句,典雅而有趣味。收到郭瑞三赠书后,我回赠一诗:

致仕情何似,木兰返故居。

当窗陈笔砚,理我旧时书。

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